गोंदिया (13 जून):कभी अपने बेहतरीन विकास कार्यों और अनोखे उपक्रमों के दम पर पूरे जिले में ‘स्मार्ट ग्राम पंचायत’ के रूप में नाम कमाने वाली गोंदिया तालुका की गंगाझरी ग्राम पंचायत इस समय भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। इस ग्राम पंचायत में हुए कथित निधि गबन का मामला अब पूरे गोंदिया जिले में चर्चा का विषय बन चुका है। प्रशासन द्वारा इस मामले की जांच के आदेश तो दे दिए गए हैं, लेकिन “जांच में क्या सच बाहर आएगा या मामले को दबा दिया जाएगा?”, इस पर पूरे जिलेवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या है पूरा मामला?
विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी इस हाई-प्रोफाइल ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर करीब 3 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता घोटाला होने का सनसनीखेज आरोप स्थानीय ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ‘स्मार्ट’ बोर्ड के पीछे भ्रष्टाचार का बड़ा खेल खेला गया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने न केवल जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी, बल्कि न्याय की मांग को लेकर उग्र धरना प्रदर्शन भी किया।
जांच समिति पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने ठुकराया
ग्रामीणों के लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए पंचायत समिति प्रशासन ने आनन-फानन में दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। हालांकि, ट्विस्ट तब आया जब ग्रामीणों को पता चला कि जांच करने वाले दोनों ही अधिकारी स्वयं पंचायत विभाग से हैं।”जब विभाग के ही लोग जांच करेंगे, तो निष्पक्ष न्याय कैसे मिलेगा?”इसी आशंका के चलते ग्रामीणों ने इस दो सदस्यीय समिति को सिरे से खारिज कर दिया और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ गए।
‘बड़े साहब’ की भूमिका संदिग्ध, ‘क्लीन चिट’ देने की तैयारी!
सूत्रों से मिली चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, जिला परिषद पंचायत विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले में कथित तौर पर आरोपियों को बचाने की ढाल बन रहे हैं। आरोप है कि वे ग्राम पंचायत को ‘क्लीन चिट’ दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इस बड़े अधिकारी की संदिग्ध भूमिका ने ग्रामीणों के संदेह को और गहरा कर दिया है।
फर्जी GST बिल जुटाने में लगे पूर्व सरपंच और अधिकारी
जैसे ही जांच की आंच तेज हुई है, घोटाले के मुख्य आरोपियों में हड़कंप मच गया है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी और पूर्व सरपंच इस समय अपनी गर्दन बचाने के लिए GST बिलों की जुगाड़ करने में दिन-रात एक कर रहे हैं, ताकि कागजी तौर पर खर्चों को सही दिखाया जा सके।
गोपनीयता के खेल पर टिकी नजरें
फिलहाल, प्रशासन इस पूरी जांच प्रक्रिया को बेहद गुप्त रख रहा है। किसी भी तरह की जानकारी बाहर लीक नहीं होने दी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या यह जांच केवल एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी या फिर ‘स्मार्ट’ घोटाले की तह तक जाकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा? इसका फैसला तो आने वाला वक्त ही करेगा।




